Tuesday, 10 June 2014

सबको ज़िंदगी के सब rule आते है

सबको  ज़िंदगी  के  सब  rule  आते  है
कुछ  याद  रखते  है  कुछ  भूल  जाते  है
लिखे  थे  जो  खत  उसको  देने  के  लिए
आज  पड़े  कही  कोने  में  वो  धूल  खाते  है

नहाने  के  बाद  खुद  को  आईने  में  देख  कर  याद  कर  लेते  है
वरना  तो  हम  खुद  को  रोज़  भूल  जाते  है

हमने  कहने  की  कोशिश  बहुत  की  पर  कभी  कह  न  पाये
पर  वो  हर  बार  आते  जाते  कुछ  बोल  जाते  है

कश्ती  पर  भरोसा  कर  के  उसमे  बैठ  तो  जाते  है
पर  कश्ती  चलने  वाले  को  क्यों  भूल  जाते  है ?

अरे  ओ  ज़िंदगी  भर  नफरत  करने  वालो
तुम्हे  क्या  लगता  है  गंगा  नहाने  से  क्या  पाप  धूल  जाते है ?

देखा  था  एक  चाँद  का  टुकड़ा  एक  दिन  बस  स्टैण्ड  पर
आज  कल  बस  पकड़ने  हम  रोज़  जाते  है

सच्चा  हूँ     दिल  नही  दुखाया  कभी  किसी  का
ना  जाने  क्यों  मेरे  बोलने  से  लोग  चीड़  जाते  है

अच्छे  काम  करने  वालो  विश्वास  रखो  उस  ऊपर  वाले  पे
आते  है  भगवन  ज़मीन  पे  जरूर  आते  है

Friday, 11 April 2014

जिंदगी चलती जाती है

जिंदगी चलती जाती है
बचपन होता है
जवानी खिलती है
और फिर मौत आजाती है

समय कि रफ़्तार से जो चला वो जीता है
और जो  रह गया पीछे उसकी दुनिया उजड़ जाती है
जिंदगी चलती जाती है

वो खुश नसीब है जिनके दिल के कागज़ पे कोई नाम लिख गया
वरना ज़िंदगियाँ तो कोरे कागज़ सी गुजर जाती है
जिंदगी चलती जाती है

जिसे रास न आया ये जहाँ उसने अपना जहाँ बना लिया
और कुछ लोगो को तो मजबूरियाँ ही मार जाती है
जिंदगी चलती जाती है

प्यार में जो जान देदे, वो बुजदिल आशिक नहीं
सच्चे आशिको कि ज़िंदगी तो यादों के सहारे गुजर जाती है
जिंदगी चलती जाती है

जो फूलो में पले है उन्हें दर्द का क्या पता
कुछ ज़िंदगियाँ तो काँटों पे गुजर जाती है
जिंदगी चलती जाती है

Wednesday, 15 January 2014

क्या करू माँ आज तेरी याद आ ही गई

सोचा  था  मन  लगा  लूंगा  अपना  कही  और  तुझे  भूल  जाऊंगा 
न  तेरी  याद  में  अकेला  बैठूंगा  न  आँसू  बहाऊंगा 
पर  क्या  करू   माँ  आज  तेरी  याद  आ  ही  गई 

बीमार  होता  था  जब , तब  तू  पास  होती  थी 
आज  बीमार  हु  तो  तुझे  बताने  में  भी  डर  लगता  है 
तू  जब  अपने  हाथ  से  रोटी  खिलाती  थी  तो  सब  ठीक  लगता  था 
पर  अब  अकेले  खाने  का  मन  नही  करता  है 
सोचा  था  अकेले  लड़ने  कि  हिम्मत  आ  गई 
पर  क्या  करू  माँ  आज  तेरी  याद  आ  ही  गयी 

मेरे  हर  झूठ  को  जो  तू  ऐसे  पकड़  लेती  है 
मुझसे  तो  नहीं  पूछती  पर 
मेरी  आवाज़  से  मेरा  हाल  पता  कर  लेती  है
ये  जादूगरी  तूने  कहा  से  सीखी  है?
तेरे  आगे  तो  कृष्ण  कि  लीला  भी  फीकी  है 

अभी  लगा  ही  था  कि  तेरे  बिना  ये  दुनिया  रास  आगई 
पर  क्या  करू  माँ  आज  तेरी  याद  आ  ही  आगई !!

Love  you  maa!! :')

Saturday, 16 November 2013

कुछ शेर

  • अब  तो  सांस  लेने  में  भी  डर  लगता  है
    कि  कुछ  ख्वाईशे  अभी  सोयी  है  कही  फिर  से  न जाग  जाये!! 
  • कि मरने के बाद भी वो मेरी कब्र के पास आकर लेट गये
    और हमको लगा था आगे का सफ़र अकेले ही तय करना पड़ेगा!! (मेरे उन दोस्तों के लिए जिन्होंने अब तक मेरा साथ दिया :) )
  • गमो से हाथ ना मिलते तो क्या करते
    तन्हाइयो में आँसु ना बहाते तो क्या करते
    यार ने कि थी रोशनी कि उम्मीद हमसे
    हम खुद को ना जलाते तो क्या करते!!
  • उनको जीना नहीं आता तो इसमें मेरी क्या गलती
    में तो बोतल लेकर उनके पास भी गया था!!
  • अक्सर अपने नाम से बुलाने पर भी जाना भूल जाते थे
    माँ से दूर होने का असर ही कुछ ऐसा था!!
  •  अरे रफ़्तार बहुत ज्यादा है संभालो खुद को
    आज कल अख़बार बहुत ज्यादा है संभालो खुद को!!
  • आज कल सब अपनी ज़ेबो में मरहम रखते है
    क्योकि आज कल कागज़ के टुकड़े भी आग लगाने का दम रखते है!!
  • खुदा ने हर मोड़ पे दो रस्ते दिए
    चुन ना भी खुद था और बनाना भी खुद !!
  • ना लड़ाई अच्छी लगती है ना खून अच्छा लगता है
    मुझे तो बस देश में सुकून अच्छा लगता है !!
  • एक टूट ता हुआ तारा मरते मरते मुझसे सच कह गया
    तुम एक दिन चैन कि नींद क्या सोये वो जालिम तुम्हारे सपने चुरा कर ले गया!!

Thursday, 17 October 2013

अच्छा तेरा प्यार लगता है

अकेले  नींद  तो  नहीं  आती  पर  तुझको  सोच  के  सो  जाते  थे
जब  तेरी  याद  तडपाती  थी  तो  तेरा  चेहरा  याद  कर  के  मुस्कुराते  थे
अब  ये  क्या  है  हमको  क्या  पता
हम  तो  आज  भी  उस  रास्ते  पर  बैठे  है  जहाँ   से  तुम  आते  जाते  थे 

वो  तेरा  मुस्कुराते  हुए  जाना 
वो  तेरा  मुझसे  नज़ारे  चुराना 
वो  बरसात  के  दिनों  में  मेरे  पास  आके  खड़े  होजाना 
वो  मेरी  दी  हुई  चॉकलेट  हलके  हस्ते  हुए  खाना 

याद  आती  है  ये  बाते  तो  रो  जाता  हूँ 
आज  भी  उन  राहो  में  कही  खो  जाता  हूँ 
दिल  में  बस  अब  तेरी  याद  बाकि  है 
सब  कुछ  होगया  बस  अपना  साथ  बाकि  है 

अकेले  जीना  अब  दुश्वार  लगता  है 
अब  दुनिया  में  सच्चा  तेरा  प्यार  लगता  है 
बस  दुनिया  में  अच्छा  तेरा  प्यार  लगता  है

Wednesday, 2 October 2013

भूल गया मुझे

ज़रूरत  के  समय , में  उसे  याद  था 
जब  आई  उसकी  बारी  वो  भूल  गया  मुझे 
खुशियों  में  वो  साथ  था
जब  आई  दुःख  की  बारी  वो  भूल  गया  मुझे 
सोचा  मिल  गया  यहाँ  जो  अपना  सा  लगे 
सारी  दुनिया  सो  जाये  तब  वो  मेरे  लिए  जगे 
लब  पर  हर  मुस्कान  हम  बाँटे 
दुःख  में  साथ  हो 
जब  कुछ  बोलना  चाहू  तब  मेरी  उससे  बात  हो 
रातो  की  नींद  हम  हस्ते  हुए  हराम  कर  दे
एक  दूजे  के  सफ़र  में  नए  रंग  भर  दे 

पर  भूल  गया  था  की  ये  कलयुग  है
यहाँ  अपना  मतलब  ही  सब  कुछ  है 
पर  एक  उम्मीद  है  की  शायद  एक  सवेरा  हो 
मेरे  जज्बातों  को  समझने  वाला  यहाँ  कोई  तो  हो 

ये  बात  आई  दिल  में  फिर याद  किया  तुझे 
पर  में  भूल  गया  था  की  तू  भूल  गया  मुझे


Thursday, 19 September 2013

क्या लिखू

क्या  लिखू 
कि  66  साल  में  देश  इतना  बढ़  गया  है  कि 
एक  इंसान  को  दूसरा  इंसान  नहीं  दिखता
क्या  लिखू 
कि  जो  हाथ  कही  लग  जाये  तो  पत्थर  को  भी  सोना  कर  दे
आज  उन  हाथो  से  बना  माल  नहीं  बिकता 

क्या  लिखू 
कि  अब  घर  और  मकान  में  फर्क  नहीं  रहा
धरती  पे  एक  ही  तो  स्वर्ग  था  वो  स्वर्ग  नहीं  रहा  है 

क्या  लिखू 
कि  लाल  मिर्च  से  अब  नज़र  नहीं  उतर  ती  है
भिन्डी  की  सब्जी  अब  गले  से  नहीं  उतर  ती  है
अब  तो  खाना  हमको  खायेगा  ये  दिन  भी  आयेंगे 
भगवन  अब  धरती  पर  कब  आयेंगे ? 

क्या  लिखू
कि  अब  तो  सच्चा  प्यार  भी  फेसबुक  पे  मिलता  है
ईमान  जैसे  एक  पेड़  है  जो  हवा  के  साथ  हिलता  है 
घर  100*100  का  और  दिल  चींटी  से  भी  छोटा  है 
इतना  तो  अंग्रेजो  ने  नहीं  लूटा  जितना  कांग्रेस  ने  लूटा  है 

क्या  लिखू 
कि  हम  खुद  तो  नहीं  जागते  ना  दुसरो  को  जगाते  है 
एक  दुसरे  की  राह  में  बस  कांटे  बिछाते  है 
अब  तो  चप्पल  पहन  कर  भी  चुभन  महसूस  होती  है 
यहाँ  हर  प्रशन  का  जवाब  सिर्फ  घूस  होती  है 

अच्छा  तो  सब  लिखते  है 
सोचा  कुछ  सच्चा  लिखू 
पर  सोचता  ही  रह  गया 
क्या  लिखू  क्या  लिखू  क्या  लिखू