ना जाने क्या जल्दी थी वापस जाने की
शायद आखिरी सेमेस्टर था इसलिए
छुट्टियां सच मै बङे दिन की लग रही थी
रात को इस उत्सुकता मे नींद नही आती थी की कल एक और दिन कम हो जायेगा
कितनी पराई लगी थी पहले दिन वो जगह
आज वहाँ जाने के लिए तड़प रहे है
इतनी खुशियाँ कैद है वहाँ कि
हर कोने मै एक मुस्कान नज़र आती है
उसको अब होस्टल कहने का मन नही करता
मेरा घर मेरा दिहिंग ये सुनना अच्छा लगता है
ना जाने कैसा लगेगा जब यहाँ से जायेंगे
डर लगता है सोच के वापस एक नयें माहौल मे जायेंगे
पर ये जरूर पता है
जितना सुकून वहाँ जाकर मिलता था शायद ही मिले अब कहीं
वो लोग शायद ही मिले अब कहीं
Friday, 25 December 2015
दिहिंग
Tuesday, 13 October 2015
गरमी की छुट्टियां
क्लास में बैठें बैठें जब मे बाहर देखता हूँ
वो मैदान मुझे ललचाता है
बार बार कहता है
मै अधुरा हूँ तुम्हारे बिना
वो मैदान मुझे ललचाता है
बार बार कहता है
मै अधुरा हूँ तुम्हारे बिना
सुखा पडा रहता हे वो नल
जहाँ पानी पीने के लिए लडाईयां हो जाती थी
चुपचाप बैठी रहती हे वो अम्मा आजकल
जिसको अकसर हमारी गेंद छुपाने को मिल जाती थी
शायद वो भी मायूस हो गई है खाली मैदान की तरह
जहाँ पानी पीने के लिए लडाईयां हो जाती थी
चुपचाप बैठी रहती हे वो अम्मा आजकल
जिसको अकसर हमारी गेंद छुपाने को मिल जाती थी
शायद वो भी मायूस हो गई है खाली मैदान की तरह
चुपचाप निकल जाता है वो चुस्की वाला भैया
जिसकी घंटी की आवाज़ सुनकर खेल में अल्प विराम लग जाता था
याद आती है मुझे वो बातें
चुस्की खाते वक़्त
उस बरगद के नीचे
लू भी ठंडी शीतल हवा लगती थी जहाँ
क्रिकेट पे वाद विवाद का वहाँ अलग ही मज़ा था
पर अब गर्मियों की छुट्टियां खतम हो गई है
देख रहा हूँ में उस मैदान को अभी भी
वो अभी भी मुझको बुला रहा हैं!
Sunday, 4 October 2015
भगवान
तू इतनी सुंदर है , शायद ही तुझसा कोई हो
तू माँ हैं , शायद ही तुझसा कोई हो
तेरे जीने की वज़ह तेरा परिवार होता हैं
तुझे कैसे सबसे इतना प्यार होता है ?
खुद को तू वक़्त कभी देती नहीं
अपनों के ख़िलाफ़ कुछ सहती नहीं
माँ तुझ जैसा बनना असंभव सा लगता हैं
किसी से इतना प्यार पाना सपना लगता हैं
इतना बड़ा दिल की दुनिया समां जाये
इतना त्याग सबके लिया की तुजे भगवान कहा जाये
अपने हर हाल को तू ठीक कहती हैं
हमारे लिए मुश्किलें तू हँस कर सह लेती हैं
माँ तू एक अजूबा हैं ये बात मैंने मान ली हैं
तू धरती पे भगवान का रूप है ये बात मैंने जान ली हैं!
तू माँ हैं , शायद ही तुझसा कोई हो
तेरे जीने की वज़ह तेरा परिवार होता हैं
तुझे कैसे सबसे इतना प्यार होता है ?
खुद को तू वक़्त कभी देती नहीं
अपनों के ख़िलाफ़ कुछ सहती नहीं
माँ तुझ जैसा बनना असंभव सा लगता हैं
किसी से इतना प्यार पाना सपना लगता हैं
इतना बड़ा दिल की दुनिया समां जाये
इतना त्याग सबके लिया की तुजे भगवान कहा जाये
अपने हर हाल को तू ठीक कहती हैं
हमारे लिए मुश्किलें तू हँस कर सह लेती हैं
माँ तू एक अजूबा हैं ये बात मैंने मान ली हैं
तू धरती पे भगवान का रूप है ये बात मैंने जान ली हैं!
Friday, 17 July 2015
करने से होगा !
अगर हो अंधेरा तो दीपक जला कर देखो
चाहे कितना भी हो डर कदम बढ़ा कर देखो
लोगो को दुख तो बिजली के बिल भी दे जाते है
चाहे कितना भी हो डर कदम बढ़ा कर देखो
लोगो को दुख तो बिजली के बिल भी दे जाते है
चलते फिरते कभी किसी को हँसा कर देखो
लगती है जो तुम्हें ये दुनिया इतनी बेकार
ज़रा अपने चश्मे से धुल हटा कर देखो
ज़रा अपने चश्मे से धुल हटा कर देखो
लोगो कि आदतों से उनकी छवि जो तुम बना लेते हो
कभी उनके दिल के पास जाकर तो देखो
कभी उनके दिल के पास जाकर तो देखो
देखनी हो अगर दुनिया में सबसे खुबसूरत मुस्कान
कभी अपनी माँ के लिए थोडा़ वक्त निकाल कर देखो
कभी अपनी माँ के लिए थोडा़ वक्त निकाल कर देखो
हालातों से हार कर जो तुम बेठ गऐ हो
होते हैं सपने सच थोड़ी उम्मीद जगा कर तो देखो
होते हैं सपने सच थोड़ी उम्मीद जगा कर तो देखो
Sunday, 28 June 2015
थोडा़ गुस्सा थोड़ी नाराज़गी !!
सितारों तक जाने की सड़क नही मिलती
मुझे अपने अंदर की तड़प नही मिलती
रोज मुंह फेर के चली जाती है वो
मुझे उसकी नफ़रत की जड़ नही मिलती
मुझे अपने अंदर की तड़प नही मिलती
रोज मुंह फेर के चली जाती है वो
मुझे उसकी नफ़रत की जड़ नही मिलती
कहना वो भी चाहती है बहुत कुछ सबसे
पर इस समाज से लडने की उसकी हिम्मत नही होती
पर इस समाज से लडने की उसकी हिम्मत नही होती
बेबस हो के रह जाते है लोग याहां पे धर्म के नाम पे
आतंकवादी बनने की हमे ज्यादा ओप्पोर्तुनिटी नहीं मिलती
अमीरो की दिक्कतें शायद ज्यादा बडी होती होगी
आतंकवादी बनने की हमे ज्यादा ओप्पोर्तुनिटी नहीं मिलती
अमीरो की दिक्कतें शायद ज्यादा बडी होती होगी
तब ही तो गरीबों की सुनने के लिए किसी को फुर्सत नहीं मिलती
कलम से क्रांति लाने वाले दिन शायद चले गऐ
इन बुझे हुए लोगो मे शायरी की किमत नही मिलती
उन तीन चार लोगो के सामने रो लिया करता हु मै
कुछ लोग हैं जिन्हें मेरे गमो मे खुशी नही मिलती
Thursday, 21 May 2015
ज़रूरत क्या थी
अभी दूर जाने की ज़रूरत क्या थी
इतना जल्दी आज़माने की ज़रूरत क्या थी
चंद दिन ही तो गुजरे थे तेरी बाँहो में अभी
यू छोड़ के जाने की ज़रूरत क्या थी
माना तूजे धोखे मिले है बहुत
तेरी जल्द बजी एक तरह से सही भी है
पर हमारे दिल को ये मानने की ज़रूरत क्या थी
थोड़ा रुकते मोहब्बत को जवाँ तो होने देते
एक दूजे को एक दूजे में फ़ना तो होने देते
इतनी जल्दी इन इम्तहानो की ज़रूरत क्या थी
हम तो कब से बैठे थे तुम्हारे इंतज़ार में
तुम घूम रहे थे इश्क़ के बाज़ारो में
इतनी जल्दी मोहब्बत की गलियो में जाने की ज़रूरत क्या थी
इतना जल्दी आज़माने की ज़रूरत क्या थी
चंद दिन ही तो गुजरे थे तेरी बाँहो में अभी
यू छोड़ के जाने की ज़रूरत क्या थी
माना तूजे धोखे मिले है बहुत
तेरी जल्द बजी एक तरह से सही भी है
पर हमारे दिल को ये मानने की ज़रूरत क्या थी
थोड़ा रुकते मोहब्बत को जवाँ तो होने देते
एक दूजे को एक दूजे में फ़ना तो होने देते
इतनी जल्दी इन इम्तहानो की ज़रूरत क्या थी
हम तो कब से बैठे थे तुम्हारे इंतज़ार में
तुम घूम रहे थे इश्क़ के बाज़ारो में
इतनी जल्दी मोहब्बत की गलियो में जाने की ज़रूरत क्या थी
Wednesday, 22 April 2015
आज का भारत !!
सज़ा हुआ ये सारा जहाँ तो दिखता है
फुटपाथ पे पड़े इंसान नही दिखते
बड़ता हुआ सचिन सहवाग तो दिखता है
कितने मर रहे यहाँ किसान नही दिखते
गलियो में बिजली की चोरियां तो दिखती है
नेता कर रहे घोटाले नही दिखते
गर्लफ्रेंड की बातो में प्यार बहुत दिखता है
माँ के प्यार भरे हाथ नही दिखते
काले धन की कमाई में लालच तो दिखता है
लूट रहे आम इंसान नही दिखते
चाँद पे जाता हुआ आदमी तो दिखता है
गलियो में घूमते अज्ञान नही दिखते
बड़ी बड़ी ऊँची ऊँची इमारतें तो दिखती है
नीचे गिर रहे यहाँ ईमान नही दिखते !!
फुटपाथ पे पड़े इंसान नही दिखते
बड़ता हुआ सचिन सहवाग तो दिखता है
कितने मर रहे यहाँ किसान नही दिखते
गलियो में बिजली की चोरियां तो दिखती है
नेता कर रहे घोटाले नही दिखते
गर्लफ्रेंड की बातो में प्यार बहुत दिखता है
माँ के प्यार भरे हाथ नही दिखते
काले धन की कमाई में लालच तो दिखता है
लूट रहे आम इंसान नही दिखते
चाँद पे जाता हुआ आदमी तो दिखता है
गलियो में घूमते अज्ञान नही दिखते
बड़ी बड़ी ऊँची ऊँची इमारतें तो दिखती है
नीचे गिर रहे यहाँ ईमान नही दिखते !!
Thursday, 26 February 2015
अकेला मैं !!
छुप कर बैठा हु अकेले कमरे में
अँधेरे में रहना मुझे अच्छा लगता है
कभी सच से भागना अच्छा लगता है
वहाँ जहा कोई अपना न हो
मुझे रिश्ते निभाने में डर लगता है
माना अकेले रास्ता बहुत लम्बा है
और रस्ते पे धुप और कांटे भी है
पर जिस राह पे में चल रहा हु
वहाँ कोई चले इससे मुझे डर लगता है
बाहर निकलता हु तो सिर्फ कड़वे दिल नज़र आते है
करेला खाना भी अब मुझे अच्छा लगता है
शराब में अंगूर के अलावा कुछ और भी होता होगा
जभी तो पीने के बाद हर मुँह से सिर्फ सच निकलता है
कभी कभी वो बिना बात के रूठ जाती है
मेरा उसको मनाना उसे अच्छा लगता है
दुनिया को मुझमे जज़्बात नही दिखते
दर्द दिल में छुपाना मुझे अच्छा लगता है
भागते हुए लोगो को देख कर घबराट होती है
मुझे पुराना जमाना अच्छा लगता है
अँधेरे में रहना मुझे अच्छा लगता है
कभी सच से भागना अच्छा लगता है
वहाँ जहा कोई अपना न हो
मुझे रिश्ते निभाने में डर लगता है
माना अकेले रास्ता बहुत लम्बा है
और रस्ते पे धुप और कांटे भी है
पर जिस राह पे में चल रहा हु
वहाँ कोई चले इससे मुझे डर लगता है
बाहर निकलता हु तो सिर्फ कड़वे दिल नज़र आते है
करेला खाना भी अब मुझे अच्छा लगता है
शराब में अंगूर के अलावा कुछ और भी होता होगा
जभी तो पीने के बाद हर मुँह से सिर्फ सच निकलता है
कभी कभी वो बिना बात के रूठ जाती है
मेरा उसको मनाना उसे अच्छा लगता है
दुनिया को मुझमे जज़्बात नही दिखते
दर्द दिल में छुपाना मुझे अच्छा लगता है
भागते हुए लोगो को देख कर घबराट होती है
मुझे पुराना जमाना अच्छा लगता है
Sunday, 7 September 2014
दोस्ती
देख के अपनी दोस्ती
ये दुनिया क्यों है हमको कोसती
जलती है या डरती है
या मेरी खुशिया इनको खलती है
सबने शायद चाँद देखा है
में चाँद के साथ रहता हू
हर यार ने ये बात कही है
आज में फिर कहता हू
तू मिला सब मिला
तू नही तो कुछ नहीं
खुशियो में तेरे बिना खुश रहता नही
दुःख तेरे बिना सहता नहीं
अब तू मेरी एक आदत है
रब से यही इबादत है
साथ तेरे काट जाये सफर
तेरे साथ काटो का भी ना हो असर
आँखे जब बंद हो मेरे चेहरे पे मुस्कान हो
और तेरे काँधे पे हो मेरा सर
ये दुनिया क्यों है हमको कोसती
जलती है या डरती है
या मेरी खुशिया इनको खलती है
सबने शायद चाँद देखा है
में चाँद के साथ रहता हू
हर यार ने ये बात कही है
आज में फिर कहता हू
तू मिला सब मिला
तू नही तो कुछ नहीं
खुशियो में तेरे बिना खुश रहता नही
दुःख तेरे बिना सहता नहीं
अब तू मेरी एक आदत है
रब से यही इबादत है
साथ तेरे काट जाये सफर
तेरे साथ काटो का भी ना हो असर
आँखे जब बंद हो मेरे चेहरे पे मुस्कान हो
और तेरे काँधे पे हो मेरा सर
Tuesday, 10 June 2014
सबको ज़िंदगी के सब rule आते है
सबको ज़िंदगी के सब rule आते है
कुछ याद रखते है कुछ भूल जाते है
लिखे थे जो खत उसको देने के लिए
आज पड़े कही कोने में वो धूल खाते है
नहाने के बाद खुद को आईने में देख कर याद कर लेते है
वरना तो हम खुद को रोज़ भूल जाते है
हमने कहने की कोशिश बहुत की पर कभी कह न पाये
पर वो हर बार आते जाते कुछ बोल जाते है
कश्ती पर भरोसा कर के उसमे बैठ तो जाते है
पर कश्ती चलने वाले को क्यों भूल जाते है ?
अरे ओ ज़िंदगी भर नफरत करने वालो
तुम्हे क्या लगता है गंगा नहाने से क्या पाप धूल जाते है ?
देखा था एक चाँद का टुकड़ा एक दिन बस स्टैण्ड पर
आज कल बस पकड़ने हम रोज़ जाते है
सच्चा हूँ दिल नही दुखाया कभी किसी का
ना जाने क्यों मेरे बोलने से लोग चीड़ जाते है
अच्छे काम करने वालो विश्वास रखो उस ऊपर वाले पे
आते है भगवन ज़मीन पे जरूर आते है
कुछ याद रखते है कुछ भूल जाते है
लिखे थे जो खत उसको देने के लिए
आज पड़े कही कोने में वो धूल खाते है
नहाने के बाद खुद को आईने में देख कर याद कर लेते है
वरना तो हम खुद को रोज़ भूल जाते है
हमने कहने की कोशिश बहुत की पर कभी कह न पाये
पर वो हर बार आते जाते कुछ बोल जाते है
कश्ती पर भरोसा कर के उसमे बैठ तो जाते है
पर कश्ती चलने वाले को क्यों भूल जाते है ?
अरे ओ ज़िंदगी भर नफरत करने वालो
तुम्हे क्या लगता है गंगा नहाने से क्या पाप धूल जाते है ?
देखा था एक चाँद का टुकड़ा एक दिन बस स्टैण्ड पर
आज कल बस पकड़ने हम रोज़ जाते है
सच्चा हूँ दिल नही दुखाया कभी किसी का
ना जाने क्यों मेरे बोलने से लोग चीड़ जाते है
अच्छे काम करने वालो विश्वास रखो उस ऊपर वाले पे
आते है भगवन ज़मीन पे जरूर आते है
Friday, 11 April 2014
जिंदगी चलती जाती है
जिंदगी चलती जाती है
बचपन होता है
जवानी खिलती है
और फिर मौत आजाती है
समय कि रफ़्तार से जो चला वो जीता है
और जो रह गया पीछे उसकी दुनिया उजड़ जाती है
जिंदगी चलती जाती है
वो खुश नसीब है जिनके दिल के कागज़ पे कोई नाम लिख गया
वरना ज़िंदगियाँ तो कोरे कागज़ सी गुजर जाती है
जिंदगी चलती जाती है
जिसे रास न आया ये जहाँ उसने अपना जहाँ बना लिया
और कुछ लोगो को तो मजबूरियाँ ही मार जाती है
जिंदगी चलती जाती है
प्यार में जो जान देदे, वो बुजदिल आशिक नहीं
सच्चे आशिको कि ज़िंदगी तो यादों के सहारे गुजर जाती है
जिंदगी चलती जाती है
जो फूलो में पले है उन्हें दर्द का क्या पता
कुछ ज़िंदगियाँ तो काँटों पे गुजर जाती है
जिंदगी चलती जाती है
बचपन होता है
जवानी खिलती है
और फिर मौत आजाती है
समय कि रफ़्तार से जो चला वो जीता है
और जो रह गया पीछे उसकी दुनिया उजड़ जाती है
जिंदगी चलती जाती है
वो खुश नसीब है जिनके दिल के कागज़ पे कोई नाम लिख गया
वरना ज़िंदगियाँ तो कोरे कागज़ सी गुजर जाती है
जिंदगी चलती जाती है
जिसे रास न आया ये जहाँ उसने अपना जहाँ बना लिया
और कुछ लोगो को तो मजबूरियाँ ही मार जाती है
जिंदगी चलती जाती है
प्यार में जो जान देदे, वो बुजदिल आशिक नहीं
सच्चे आशिको कि ज़िंदगी तो यादों के सहारे गुजर जाती है
जिंदगी चलती जाती है
जो फूलो में पले है उन्हें दर्द का क्या पता
कुछ ज़िंदगियाँ तो काँटों पे गुजर जाती है
जिंदगी चलती जाती है
Wednesday, 15 January 2014
क्या करू माँ आज तेरी याद आ ही गई
सोचा था मन लगा लूंगा अपना कही और तुझे भूल जाऊंगा
न तेरी याद में अकेला बैठूंगा न आँसू बहाऊंगा
पर क्या करू माँ आज तेरी याद आ ही गई
बीमार होता था जब , तब तू पास होती थी
आज बीमार हु तो तुझे बताने में भी डर लगता है
तू जब अपने हाथ से रोटी खिलाती थी तो सब ठीक लगता था
पर अब अकेले खाने का मन नही करता है
सोचा था अकेले लड़ने कि हिम्मत आ गई
पर क्या करू माँ आज तेरी याद आ ही गयी
मेरे हर झूठ को जो तू ऐसे पकड़ लेती है
मुझसे तो नहीं पूछती पर
मेरी आवाज़ से मेरा हाल पता कर लेती है
ये जादूगरी तूने कहा से सीखी है?
तेरे आगे तो कृष्ण कि लीला भी फीकी है
अभी लगा ही था कि तेरे बिना ये दुनिया रास आगई
पर क्या करू माँ आज तेरी याद आ ही आगई !!
Love you maa!! :')
Saturday, 16 November 2013
कुछ शेर
- अब तो सांस लेने में भी डर लगता है
कि कुछ ख्वाईशे अभी सोयी है कही फिर से न जाग जाये!!
- कि मरने के बाद भी वो मेरी कब्र के पास आकर लेट गये
और हमको लगा था आगे का सफ़र अकेले ही तय करना पड़ेगा!! (मेरे उन दोस्तों के लिए जिन्होंने अब तक मेरा साथ दिया :) )
- गमो से हाथ ना मिलते तो क्या करते
तन्हाइयो में आँसु ना बहाते तो क्या करते
यार ने कि थी रोशनी कि उम्मीद हमसे
हम खुद को ना जलाते तो क्या करते!!
- उनको जीना नहीं आता तो इसमें मेरी क्या गलती
में तो बोतल लेकर उनके पास भी गया था!!
- अक्सर अपने नाम से बुलाने पर भी जाना भूल जाते थे
माँ से दूर होने का असर ही कुछ ऐसा था!!
- अरे रफ़्तार बहुत ज्यादा है संभालो खुद को
आज कल अख़बार बहुत ज्यादा है संभालो खुद को!!
- आज कल सब अपनी ज़ेबो में मरहम रखते
है
क्योकि आज कल कागज़ के टुकड़े भी आग लगाने का दम रखते है!!
- खुदा ने हर मोड़ पे दो रस्ते दिए
चुन ना भी खुद था और बनाना भी खुद !!
- ना लड़ाई अच्छी लगती है ना खून अच्छा लगता है
मुझे तो बस देश में सुकून अच्छा लगता है !!
- एक टूट ता हुआ तारा मरते मरते मुझसे सच कह गया
तुम एक दिन चैन कि नींद क्या सोये वो जालिम तुम्हारे सपने चुरा कर ले गया!!
Thursday, 17 October 2013
अच्छा तेरा प्यार लगता है
अकेले नींद तो नहीं आती पर तुझको सोच के सो जाते थे
जब तेरी याद तडपाती थी तो तेरा चेहरा याद कर के मुस्कुराते थे
अब ये क्या है हमको क्या पता
हम तो आज भी उस रास्ते पर बैठे है जहाँ से तुम आते जाते थे
वो तेरा मुस्कुराते हुए जाना
वो तेरा मुझसे नज़ारे चुराना
वो बरसात के दिनों में मेरे पास आके खड़े होजाना
वो मेरी दी हुई चॉकलेट हलके हस्ते हुए खाना
याद आती है ये बाते तो रो जाता हूँ
आज भी उन राहो में कही खो जाता हूँ
दिल में बस अब तेरी याद बाकि है
सब कुछ होगया बस अपना साथ बाकि है
अकेले जीना अब दुश्वार लगता है
अब दुनिया में सच्चा तेरा प्यार लगता है
बस दुनिया में अच्छा तेरा प्यार लगता है
Wednesday, 2 October 2013
भूल गया मुझे
ज़रूरत के समय , में उसे याद था
जब आई उसकी बारी वो भूल गया मुझे
खुशियों में वो साथ था
जब आई दुःख की बारी वो भूल गया मुझे
सोचा मिल गया यहाँ जो अपना सा लगे
सारी दुनिया सो जाये तब वो मेरे लिए जगे
लब पर हर मुस्कान हम बाँटे
दुःख में साथ हो
जब कुछ बोलना चाहू तब मेरी उससे बात हो
रातो की नींद हम हस्ते हुए हराम कर दे
एक दूजे के सफ़र में नए रंग भर दे
पर भूल गया था की ये कलयुग है
यहाँ अपना मतलब ही सब कुछ है
पर एक उम्मीद है की शायद एक सवेरा हो
मेरे जज्बातों को समझने वाला यहाँ कोई तो हो
ये बात आई दिल में फिर याद किया तुझे
पर में भूल गया था की तू भूल गया मुझे
Thursday, 19 September 2013
क्या लिखू
क्या लिखू
कि 66 साल में देश इतना बढ़ गया है कि
एक इंसान को दूसरा इंसान नहीं दिखता
क्या लिखू
कि जो हाथ कही लग जाये तो पत्थर को भी सोना कर दे
आज उन हाथो से बना माल नहीं बिकता
क्या लिखू
कि अब घर और मकान में फर्क नहीं रहा
धरती पे एक ही तो स्वर्ग था वो स्वर्ग नहीं रहा है
धरती पे एक ही तो स्वर्ग था वो स्वर्ग नहीं रहा है
क्या लिखू
कि लाल मिर्च से अब नज़र नहीं उतर ती है
भिन्डी की सब्जी अब गले से नहीं उतर ती है
अब तो खाना हमको खायेगा ये दिन भी आयेंगे
भगवन अब धरती पर कब आयेंगे ?
क्या लिखू
कि अब तो सच्चा प्यार भी फेसबुक पे मिलता है
ईमान जैसे एक पेड़ है जो हवा के साथ हिलता है
घर 100*100 का और दिल चींटी से भी छोटा है
इतना तो अंग्रेजो ने नहीं लूटा जितना कांग्रेस ने लूटा है
क्या लिखू
कि हम खुद तो नहीं जागते ना दुसरो को जगाते है
एक दुसरे की राह में बस कांटे बिछाते है
अब तो चप्पल पहन कर भी चुभन महसूस होती है
यहाँ हर प्रशन का जवाब सिर्फ घूस होती है
अच्छा तो सब लिखते है
सोचा कुछ सच्चा लिखू
क्या लिखू क्या लिखू क्या लिखू
Friday, 23 August 2013
दूर हूँ मजबूर हूँ
दूर हूँ मजबूर हूँ
शायद में बेकसुर हूँ
तेरी यादें दिल में घर करी हुई है
लेकिन तेरी नज़रों में चूर चूर हूँ
दूर हूँ मजबूर हूँ
चाँद बोला में भी आशिक़ तू भी आशिक़
तो फर्क किस बात का
में बोल तेरी चाँदनी तेरे पास है
पर में उससे थोडा दूर हूँ
दूर हूँ मजबूर हूँ
पता माँगा मैंने तेरा हवा से
हवा बोली हम मतलब नहीं रखते बेवफा से
में बोल बेवफाई तो नज़रो ने की तो सजा दिल को क्यों मिले
हवा बोली क्यों काटी वो कलिया जिनमे चाहत के थे फूल खिले
फिर दोस्ती बोली खिला दूंगी ऐसी कलिया ऐसा में दस्तूर हूँ
में बोला
दूर हूँ मजबूर हूँ
शायद में बेक़सूर हूँ
Tuesday, 13 August 2013
शहर
रात थी और मै था
आँखों में प्रलय था
रास्ते भी कोसने लगे थे अब तो
शायद ये उसी का शहर था
बदनाम हुए उस नाम से जो नाम ही गलत था
वो तो सही थी पर उसको पाने का ख्वाब ही गलत था
हँसते हुए चेहरे तो खूब देखे है
पर उसके मुस्कुराने का अंदाज़ अलग था
दौड़ी चली आती थी वो मेरी साइकिल की आवाज सुन के
शायद उन दिनों मेरा भी अंदाज़ अलग था
समय बदला , जहाँ बदला , हम बदले
बस एक सवाल था
वो सच में ऐसी थी की
बस एक नकाब था
बदनाम हुए उस नाम से जो नाम ही गलत था
वो तो सही थी पर उसको पाने का ख्वाब ही गलत था
हँसते हुए चेहरे तो खूब देखे है
पर उसके मुस्कुराने का अंदाज़ अलग था
दौड़ी चली आती थी वो मेरी साइकिल की आवाज सुन के
शायद उन दिनों मेरा भी अंदाज़ अलग था
समय बदला , जहाँ बदला , हम बदले
बस एक सवाल था
वो सच में ऐसी थी की
बस एक नकाब था
Sunday, 11 November 2012
सुट्टे का धुआं
वो बारिश की बूंदों में सुट्टे का धुआं
सुट्टे के धुंए में गम घूम हुआ
आंसुओ को धुंए में बदलते रहे
सब कुछ यहाँ अब गुमसुम हुआ
फिक्र को धुंए में उड़ाते गए
खुशियों के गीत हम गाते गए
जो मिला राहो में उसे सुट्टा दिया
एसे हमने सबका गम कम किया
जिंदगी का सफ़र कुछ यू तय हुआ
वो बारिश की बूंदों में सुट्टे का धुआं
जीवन को अपने हमने कम किया
पिया हमने सिर्फ सुट्टा पिया
उम्र को अपनी कम करते गए
अपनों की खुशियों को गम में बदलते गए
एक दिन धुंए से जिंदगी का दीपक बंद हुआ
वो बारिश की बूंदों में सुट्टे का धुआं
सुट्टे के धुंए में गम घूम हुआ
आंसुओ को धुंए में बदलते रहे
सब कुछ यहाँ अब गुमसुम हुआ
फिक्र को धुंए में उड़ाते गए
खुशियों के गीत हम गाते गए
जो मिला राहो में उसे सुट्टा दिया
एसे हमने सबका गम कम किया
जिंदगी का सफ़र कुछ यू तय हुआ
वो बारिश की बूंदों में सुट्टे का धुआं
जीवन को अपने हमने कम किया
पिया हमने सिर्फ सुट्टा पिया
उम्र को अपनी कम करते गए
अपनों की खुशियों को गम में बदलते गए
एक दिन धुंए से जिंदगी का दीपक बंद हुआ
वो बारिश की बूंदों में सुट्टे का धुआं
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